इस दिवाली दिल्ली के नज़दीक पहुंच गया दून… प्रदूषण 10 गुना से ज़्यादा रहा

यह दिवाली देहरादून के दिल्ली के नज़दीक ले आई… इस दिवाली आतिशबाज़ी की वजह से दून घाटी के पर्यावरण को भारी नुक़सान पहुंचा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद निर्धारित समय के अलावा भी जमकर पटाखे फोड़े गए और उसकी कीमत चुकाई दून की फ़िज़ा ने.

एक गैर सरकारी संस्था गति फाउंडेशन ने दीपावली की रात नौ बजे से ग्यारह बजे तक शहर के बल्लीवाला, निरंजनपुर, घंटाघर, पटेलनगर, सहारनपुर चौक समेत दस स्थानों पर वायु प्रदूषण की जांच की. इस जांच में जो तथ्य सामने आए वे बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले हैं.

गति फ़ाउंडेशन के अनुसार सभी स्थानों पर प्रदूषण का स्तर दस से पंद्रह गुना तक बढ़ा हुआ था. हालत यह थी कि धूल के 2.5 माइक्रोन कण दीपावली की रात निरंजनपुर, बल्लीवाला, नेहरू कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों में 649 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गए थे. बता दें कि धूल के 2.5 माइक्रोन कण सामान्य तौर पर साठ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है. इसका अर्थ यह हुआ कि यह दिवाली की रात यह दस गुना से ज़्यादा था.

गति फ़ाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल इसे बेहद ख़तरनाक स्थिति बताते हैं. वह बताते हैं कि प्रदूषण का स्तर घनी आबादी वाले इलाकों में ज़्यादा था. नौटियाल के अनुसार शहर में कई जगह कूड़े में आग लगी हुई थी जो संभवतः पटाखों की वजह से लगी हो. इसने स्थिति को और ज़्यादा बिगाड़ा.
अनूट नौटियाल कहते हैं कि दिवाली की रात देहरादून की कई सड़कों की स्थिति दिल्ली जैसी हो गई थी. यहां वैसा ही स्मॉग नज़र आ रहा था जितना दिल्ली में दिखता है.

ज़ाहिर है वायु प्रदूषण की यह स्थिति को जनस्वास्थय के लिए कतई अच्छी नहीं है. दून अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर डीपी जोशी कहते हैं कि सबसे ज़्यादा दिक्कत तो सांस के मरीज़ों को होगी लेकिन बाकी लोगों को भी कुछ दिन ऐहतिहात बरतनी होगी. देहरादून के घाटी होने की वजह से यहां से प्रदूषण भी देर तक बैठा रहता है इसलिए सुबह की सैर को बचना चाहिए.

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